18 सितंबर 2026 नैनीताल (हल्द्वानी)
रानीबाग फूड कोर्ट को लेकर महंत व कमल जोशी ने DM, SDM-पुलिस अधिकारियों समेत 8 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की


रानीबाग स्थित पद्मेश्वर महादेव मंदिर की भूमि पर संचालित फूड कोर्ट को लेकर विवाद सामने आया है। मंदिर के महंत प्रेम गिरी गोस्वामी और उनके रिश्तेदार समाजसेवी कमल जोशी की ओर से जिलाधिकारी, SDM एवं पुलिस अधिकारियों समेत संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।
मामले में दोनों की ओर से उत्तराखंड हाईकोर्ट में WPMS/8303/2026 याचिका भी दर्ज की गई है।
महंत पक्ष का आरोप है कि बिना पूर्व सूचना/नोटिस दिए मंदिर को दान में प्राप्त बताई जा रही भूमि पर प्रशासन द्वारा बुलडोजर की कार्रवाई की गई। उनका यह भी दावा है कि कार्रवाई के दौरान अधिकारियों की ओर से इसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आदेश से जुड़ा बताया गया, हालांकि उनके अनुसार उन्हें ऐसा कोई लिखित आदेश अथवा पूर्व नोटिस उपलब्ध नहीं कराया गया।
महंत पक्ष का यह भी आरोप है कि कुर्की से संबंधित आदेश होने के बावजूद बुलडोजर की कार्रवाई की गई।

₹26 लाख से अधिक की हर्जाने की माँग
महंत प्रेम गिरी गोस्वामी और कमल जोशी का कहना है कि मंदिर के रखरखाव एवं संचालन में सहयोग के उद्देश्य से Pure Veg Food Court विकसित किया जा रहा था, जिसमें ₹25 से ₹26 लाख से अधिक राशि खर्च की जा चुकी थी।
उनका आरोप है कि इस स्थल पर किया गया निर्माण बिना उचित प्रक्रिया के पूरी तरह तोड़ दिया गया, जिससे लाखों रुपये का नुकसान हुआ।
महंत पक्ष का कहना है कि पड़ोस के ग्रामीणों की ओर से भी कोई आपत्ति नहीं थी और सैकड़ों लोगों द्वारा NOC/समर्थन पत्र दिए गए थे।
उनका कहना है कि कार्रवाई से इस निर्माण एवं व्यवसाय को नुकसान पहुंचा है और पूरे मामले में प्रशासनिक प्रक्रिया तथा कार्रवाई के आधार को लेकर जवाब मांगा गया है।
राजनीतिक रंजिश का भी आरोप
कमल जोशी उत्तराखंड क्रांति दल डेमोक्रेटिक के प्रदेश अध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ की ओर से यह आरोप लगाया गया है कि पूर्व में उनके राजनीतिक विरोध और मुख्यमंत्री के खिलाफ किए गए विरोध-प्रदर्शनों एवं बयानों के कारण व्यक्तिगत राजनीतिक रंजिश के चलते यह कार्रवाई कराई गई।
इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। प्रशासन/सरकार का पक्ष भी इस मामले में सामने आना बाकी है।
मामले में अब मुख्य सवाल:
👉 क्या कार्रवाई से पहले लिखित नोटिस दिया गया था?
👉 बुलडोजर कार्रवाई किस आदेश के तहत हुई?
👉 यदि भूमि का वास्तविक राजस्व/स्वामित्व रिकॉर्ड मंदिर के नाम था, तो महंतों को बिना पूर्व जानकारी दिए कार्रवाई क्यों की गई?
👉 क्या महंतों को सामान हटाने अथवा निर्माण खाली करने का कोई पूर्व नोटिस दिया गया था?
👉 ₹25–26 लाख से अधिक के निवेश और हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा—DM, प्रशासन या सरकार?
👉 क्या कार्रवाई मुख्यमंत्री के किसी लिखित आदेश के आधार पर की गई थी या किसी अन्य प्रशासनिक/राजस्व आदेश के तहत?
रानीबाग फूड कोर्ट विवाद अब हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। मामले में प्रशासन और सरकार के जवाब पर सभी की नजर है।



