उत्तराखण्ड जनहित नैनीताल न्यूज रामनगर

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व प्रभाग ने बाघ दिवस धूमधाम से मनाया !

ख़बर शेयर करें

29 जुलाई 2026  कार्बेट टाइगर रिजर्व, उत्तराखण्ड, रामनगर, नैनीताल

कार्बेट टाइगर रिजर्व में उत्साह एवं जनसहभागिता के साथ मनाया गया विश्व बाघ दिवस विद्यार्थियों, स्थानीय समुदाय एवं पर्यटकों को बाघ संरक्षण का दिया गया संदेश

विश्व में बाघों के संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष मनाए जाने वाले विश्व बाघ दिवस के अवसर पर आज दिनांक 29 जुलाई., 2026 को डॉ. साकेत बडोला, आई.एफ.एस. फील्ड डायरेक्टर, कार्बेट टाइगर रिजर्व एवं श्री राहुल मिश्रा, आई.एफ.एस. उप निदेशक, कार्बेट टाइगर रिजर्व के निर्देशन में कार्बेट टाइगर रिजर्व की ढेला रेंज, सर्पदुली रेंज एवं कालागढ़ वन्यजीव प्रशिक्षण केन्द्र में विविध जन-जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया । कार्यक्रमों में विद्यार्थियों, स्थानीय समुदाय, पर्यटकों एवं वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सक्रिय सहभागिता रही।

ढेला रेंज के ढेला स्वागत द्वार पर श्री बिन्दर पाल, पार्क वार्डन के नेतृत्व में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में बाघ रक्षक विद्यालय ढेला, ढिकुली एव कालागढ़ के छात्र-छात्राओं, अध्यापकों, होटल एसोसिएशन क सदस्यों, स्थानीय ग्रामीणों, पर्यटकों जिप्सी चालकों एवं नेचर गाइडों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। इस अवसर पर क्ताओं ने बाघों की पारिस्थितिकीय महत्ता, जैव-विविधता संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों क सतत संरक्षण पर विस्तार से प्रकाश डाला ।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में उपसिथित सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, छात्र-छात्राओं एवं प्रतिभागियों द्वारा बाघ संरक्षण, जैव-विविधता संवर्धन एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक संकल्प लिया गया। तत्पश्चात श्री बिन्दर पाल, पार्क वार्डन द्वारा विश्व बाघ दिवस के महत्व वन पारिर्िथतिकी तंत्र में बाघ की भूमिका, उसक समक्ष विद्यमान चुनौतियों तथा कार्बेट टाइगर रिजर्व द्वारा किए जा रहे संरक्षणात्मक प्रयासों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि स्वस्थ एवं संतुलित वन पारिरिथतिकी तंत्र का प्रमुख संकेतक है। बाघों का संरक्षण वन, जल स्रोतों, जैव-विविधता तथा मानव जीवन की सुरक्षा से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से वन्यजीवों एवं उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर क्षेत्र पंचायत सदस्य (बी.डी.सी) श्री सुनील नैवाल एवं ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ढेला श्री प्रह्लाद सिंह द्वारा भी छात्र-छात्राओं को वन्यजीव एवं बाघ संरक्षण के महत्व, जैव-विविधता, पर्यावरणीय सतुलन तथा प्रकृति क प्रति प्रत्येक नागरिक कं दायित्वों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गईं। उन्होंने विद्यर्थियं को प्रकृति एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनने तथा भविष्य ‘ में संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता निभाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने विभिन्न वन्यजीवों की आकर्षक वेशभूषा धारण कर तथा हाथों में संरक्षण संबंधी स्लोगन एवं संदेशों से युक्त तखि्तियाँ लेकर जन-जागरूकता रैली एवं प्रस्तुति ‘दी, जिसने उपरसिथित सभी लोगों का ध्यान वन्यजीव संरक्षण की ओर आकर्षित किया । कार्यक्रम के उपरांत प्रतिभागियों को सूक्ष्म जलपान कराया गया तथा बाघ रक्षक विद्यालयाँ स आए छात्र-छात्राओँ को कार्बेट क समृ्ध वन क्षेत्र में जंगल सफारी कराई गई, जहाँ उन्हें प्रकृतिक आवास में वन्यजीवों के संर्षण एवं जैव-विविधता के महत्व की व्यवहारिक जानकारी प्रदान की गई। विद्यराथियों में इस अनुभव को लेकर विशेष उत्साह एवं जिज्ञासा देखने को मिली।

इसी क्रम में सर्पदुली रेंज के धनगढ़ी इंटरप्रिटेशन सेंटर में श्री संजय पाण्डे, वन क्षेत्राधिकारी, सर्पदुली के नेतृत्व में राजकीय इंटर कॉलेज, ढिकुली के छात्र-छात्राओं के साथ विश्व बाघ दिवस गरिमामय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम का उद्दश्य युवाओं में बाघ संरक्षण क प्रति संवेदनशीलता विकसित करना तथा उन्हें पर्यावरणीय संतुलन में बाघों की महत्वपूर्ण भूमिका से परिचित कराना था। विद्यर्थियों को कार्बेट टाइगर रिजवे की समृद्ध जैव-विविधता, बाघों के व्यवहार उनके पदचिह्लों की पहचान, मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम तथा वन्यजीव संरक्षण की विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें धनगढ़ी इंटरप्रिटेशन सेंटर का शैश्षिक ‘भ्रमण कराया गया, जहाँ आधनिक प्रदर्शनों के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण एवं कार्बेट के प्राक तिक इतिहास से अवगत कराया गया ।

कार्यक्रम के समापन पर सभी शिक्षकं, छात्र-छात्राओं एवं वन कर्मियों ने वनों में अवैध गतिविधियों की रोकथाम, प्लास्टिक मुक्त पर्यावरण के निर्माण तथा वन्यजीवों की सुरक्षा हेतु जंन-जागरूकता फैलाने का सामूहिक संकल्प लिया ।

वहीं कालागढ वन्यजीव प्रशिक्षण केन्द्र मेंश्री इन्द्र सिंह बिष्ट, वन क्षेत्राधिकारी के नेतृत्व में विश्व बाघ दिवस पर विचार-गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में स्थानीय समुदाय को बाघ संरक्षण में उनकी भूमिका एवं सहभागिता के महत्व से अवगत कराया गया। प्रशिक्षु वन आरक्षियों ने भी बाघ संरक्षण से जू्ड़े अपने अन्भव एवं विचार साझा किए । कार्यक्रम के उपरांत प्रशिक्षण केन्द्र परिसर में स्वच्छता अभियान चलाकर प्लास्टिक एवं अन्य अपशिष्ट पदाथों का संग्रहण एवं वैज्ञानिक निस्तारण किया गया ।

कार्यक्रमों के दौरान बाघ रक्षक विद्यालय ढेला, ढिकली एवं कालागढ़ के छात्र-छात्राओं को बताया गया कि भारत में वर्तमान में लगभग 3,682 बाघ विद्यमान हैं तथा विश्व के लगभग 70 प्रतिशत बाघ भारत में पाए जाते हें। यह उपलब्धि भारत की प्रभावी संरक्षण नीति एवं वन विभाग, स्थानीय समुदायों तथा संरक्षण सहयोगियों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। विद्यार्थियों से बाघों एवं उनके प्राकृतिक आवास के संरक्षण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान भी किया गया ।

इस अवसर पर श्री बिन्दर पाल, पार्क वार्डन, श्री नवीन चन्द्र पाण्डे, वन क्षेत्राधिकारी ढेला । बिजरानी, श्री संजय पाण्डे, वन ्षेत्राधिकारी सर्पदुली, श्री अभय जोशी, वन क्षेत्राधिकारी झिरना, श्री इन्दर सिंह बिष्ट, वन क्षेत्राधिकारी, वन्यजीव प्रशिक्षण केन्द्र कालागढढ़, श्री ललित आर्या, ‘ वन क्षेत्राधिकारी ईको-टूरिज्म, श्री प्रमोद त्रिपाठी. वन क्ेत्राधिकारी शोध एवं अनुश्रवण रेंज, श्री सुनील नैवाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य (80c): श्री प्रहलाद जी, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ढेला, श्री मोहन चन्द्र जोशी, मुख्य प्रकृतिविद, श्री गौरव धोतरे, वरिष्ठ प्रकतिविद, श्री जीवन रौतेला, प्रकृतिविद, श्री लवकुश सैनी, प्रकृतिविद, श्री बब्लू पाण्डेय, प्रकृतिविद, श्री देवेन्द्र कार्की, श्री मनोज जोशी, प्रधानाचायं राजकीय इंटर कॉलेज, ढेला, श्रो न वेन्दु मठपाल, प्रवक्ता, राजकीय इंटर कॉलेज, ढेला श्री दीपक सिंह नेगी, प्रक्ता, राजकीय इंटर कॉलेज, कालागढ़, बाघ रक्षक विद्यालय ढेला, ढिकली एवं कालागढ़ के छात्र-छात्राए. काबेट टाइगर रिजर्व के अधिकारी एवं कर्मचारी, ग्राम ढेला के ग्रामीण, होटल एसोसिएशन के सदस्य, अनवृत फाउण्डेशन क प्रतिनिधि, प्रकृति प्रेमी, पर्यटक, जिप्सी चालक तथा नेचर गाइड उपस्थित रहे।

अपने संदेश में डॉ. साकेत बडोला, आई.एफ.एस. फील्ड डायरेक्टर, कार्बेंट टाइगर रिजर्व ने कहा कि बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि सम्पर्ण वन पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के प्रतीक हैं। बाघों का संरक्षण हमारी जैव-विविधता, जल स्रोतों, वनों एवं भावी पीढियों के स्रक्षित भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सभी नागरिकों से वन्यजीवों एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया ।

विश्व बाघ दिवस के अवसर पर आयोजित इन कार्यक्रमों ने विद्यार्थियों एवं आमजन में वन्यजीव सरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ यह संदेश भी दिया कि प्रकृति एवं वन्यजीवों का संरक्षण कंवल वन विभाग का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक एवं सामाजिक जिम्मेदारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *