12 अक्टूबर 2026
घ
#घर में एक शख्स सोया हुआ है….सुबह सुबह … 30 से 50 सादी वर्दी में पुलिस वाले आते हैं… दरवाजा खटखटाते हैं… एक महिला बाहर निकलती है…. पुलिस वाले उसे धक्का देके … अंदर सोए उस शख्स को खींचकर रगड़कर बाहर लाती है… घर में सब लोग चीखते चिल्लाते हैं… वारंट मांगते हैं…..शख्स कहता है… मुझे फ्रेश तो हो जाने दो… मैं अभी सोया हुआ था… ना पॉटी करने गया हूँ … ना नहाया हूँ… ना चाय पिया हूँ … ना नाश्ता किया हूँ…. आप मुझे ऐसे नहीं ले जा सकते…. पुलिस वाले… उसे जस की तस हालत में मारते पीटते लातों से धकियाते … सीड़ियों से घसीटते हुए….गाड़ी में बिठाते हैं…. और थाने ले आते हैं…. !
दोनों ही मामलों में … लोकतंत्र की हत्या हुई है… लेकिन दोनों ही मामलों में … लोगों की बिल्कुल दो विपरीत राय हैं…. एक मोदी समर्थक शख्स है तो मोदी विरोधी लोग जश्न मना रहे थे…. अब नये मामले में… मोदी अंधविरोधी शख्स है तो मोदी समर्थक लोग खुशी मना रहे हैं… मोदी अंधविरोधी… बिलबिला रहे हैं… लेकिन असली और सच्चे लोकतंत्र प्रेमी… दोनों ही मामलों में प्रशासन की कार्रवाई से निराश हैं….. क्योंकि #अर्नव_गोस्वामी से शुरु हुआ ये चलन… #ध्रुव_राठी तक आ पहुंचा है…..लोकतंत्र के लिए ये ठीक नहीं है… माना कि दोनों ही शख्स अपने अपने मामलों में गलत थे… पर उन्हें हिरासत में लेने का तरीका लोकतांत्रिक तो कतई नहीं है… खैर लोगों ने अपने अपने हिसाब से लोकतंत्र तय किया है… कल इसका खामियाजा हर किसी को भुगतना पड़ेगा…. क्योंकि इसके लिए लोग खुद जिम्मेदार हैं…. जो अपनी अपनी विचारधारा के अनुसार सरकारों को मनमानी करने की छूट दे रहे हैं….. !
#दो_टूक -:- अगर अर्नव गोस्वामी के साथ पुलिस ज्यादती सही थी तो ध्रुव राठी के साथ ये ज्यादती गलत क्यों हैं? ये अलग बात है कि ध्रुव राठी को ज्यादा लात घूंसो से पीटा गया… सीढ़ियों से घसीटकर लाया गया… अर्नव गोस्वामी को पुलिस उठाकर लाई थी… लेकिन दोनों ही मामले मेरी नजर में आलोकतांत्रिक हैं !
#नोट -:- अर्नव_गोस्वामी और ध्रुव राठी दोनों ने खुद अपनी पीड़ा बयाँ की थी !
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