1 अक्टूबर 2026 , टिहरी

गंगा के ऊपर एक जीवन रेखा- सिंगटाली झूला पुल……
सिंगटाली झूला पुल जो कभी तल्ला, मल्ला और बिचला ढांगू के लिए अति महत्वपूर्ण हुआ करता था, यह टिहरी और पौड़ी को जोड़ता था, इस क्षेत्र के लिए यह जीवन रेखा से कम नहीं है। उसकी एक फोटो 70 के दशक में अखबार में छपी, जिसे आदरणीय श्री रामराज बडोनी जी द्वारा खींचा गया था। गंगा की लहरों के ऊपर झूलता सिंगटाली का यह पुल कभी सिर्फ़ आने-जाने का रास्ता नहीं था, यह दो तटों के साथ-साथ दो इलाकों, गांवों और अनगिनत रिश्तों को जोड़ने वाली जीवनरेखा था। इस पुल से होकर न जाने कितने कदम गुजरे होंगे, किसी ने बाजार की राह पकड़ी, किसी ने अपने गांव की, तो किसी ने अपनों से मिलने की।
समय बदला, सड़कें आईं और अब सिंगटाली आधुनिक मोटर पुल के नए दौर की ओर बढ़ रहा है, लेकिन उस पुराने झूला पुल से जुड़ी यादें, संघर्ष और पहाड़ की पीढ़ियों की कहानी कभी पुरानी नहीं होगी, क्योंकि कुछ पुल केवल नदी के ऊपर नहीं बनते, वे लोगों के दिलों और इतिहास के बीच बनते हैं। मुझे याद है जब हम लोग मोटर पुल के लिए संघर्ष कर रहे थे तो हमें यह भी विकल्प दिया गया कि झूला पुल को तोड़कर वही मोटर बना देते हैं, हमने साफ मना कर दिया था। झूला पुल ऐतिहासिक तो है ही यह भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है, जो झूला पुल आज खड़ा है वो 100 साल पूरे कर चुका है, जो कभी का काठ लकड़ी का पुल था वो 60 के दशक में सीमेंट तारकोल का बना। ब्रिटिश कालीन इस झूला का आज तक लोक निर्माण विभाग ने रंगरोधन किया होगा, इसके सारे कल पुर्जे आज भी ब्रिटिश कालीन हैं। 1909/10 में प्रकाशित H.G वॉल्टन की गढ़वाल गजेटियर में इस ऐतिहासिक झूला पुल (Suspension Bridge) की चर्चा की गई है, इस झूला पुल को पुस्तक में ढांगू गढ़ झूला पुल कहा गया है, तब इस पर चलने वालों से कर भी लिया जाता था।
ढाकर जात्रा हो या सरकारी सस्ते गल्ले का सामान इसी से होकर जाते थे। गढ़वाल गढ़ों की भूमि रही है, इन गढ़ों में एक ढांगू गढ़ भी एक ऐतिहासिक किला या गढ़ हुआ करता था जिसके ऐतिहासिक महत्व पर आगे कभी जानकारी साझा करेंगे। झूला पुल इसी गढ़ के सतह से लगा है जो एक शताब्दी से भी अधिक समय से सैंकड़ों गांवों को जोड़ा हुआ है। झूला पुल बनने से पहले यहां नाव चला करती थी, जिसके निशान आज भी देखे जा सकते हैं। ऊपर से तीव्र वेग से आती गंगा यहां शांत फैलाव के साथ बहती है। 1998 के आस पास इसी झूला पुल के पास बीच कैंप लगने शुरू हुए थे शायद ही यह राज्य के प्रारंभिक बीच कैंप रहा होगा। शायद यह राज्य का सबसे बड़ा प्राकृतिक बीच होगा। NGT के निर्णय के बाद यहां बीच कैंप बन्द हुआ। आज इस झूला पुल के निकट ताज और हयात होटल बन गए हैं। सिंगटाली झूला पुल अनेक स्मृतियां को संजोए एक जीता जागता प्रतीक है।
इस पुल से जुड़ी आपकी कोई याद, कहानी या पुरानी जानकारी हो तो कमेंट में जरूर साझा करें। आपकी एक याद शायद आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास का हिस्सा बन जाए। 🙏
लेखन ✍️ प्रशांत मैठाणी
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Bhishma Kukreti सिंगटाली मोटर पुल संघर्ष समिति Anil Baluni सत्यप्रसाद बडथ्वाल Uday Singh Negi Satpal Maharaj



